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mahabharat 5.108.8-9h: हे ब्रह्मन्! इन्हीं कारणों से इस दिशा को 'पूर्वा' कहा गया है; क्योंकि अति प्राचीन काल में यह दिशा देवताओं से आच्छादित थी, इसलिए इसे सबकी मूल दिशा कहा गया है।   |   mahabharat अध्याय 5.108: गरुड़का गालवसे पूर्व दिशाका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 108: गरुड़का गालवसे पूर्व दिशाका वर्णन करना  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  5.108.8-9h 
एतस्मात् कारणाद् ब्रह्मन् पूर्वेत्येषा दिगुच्यते।
यस्मात् पूर्वतरे काले पूर्वमेवावृता सुरै:॥ ८॥
अत एव च सर्वेषां पूर्वामाशां प्रचक्षते।
 
 
अनुवाद
हे ब्रह्मन्! इन्हीं कारणों से इस दिशा को 'पूर्वा' कहा गया है; क्योंकि अति प्राचीन काल में यह दिशा देवताओं से आच्छादित थी, इसलिए इसे सबकी मूल दिशा कहा गया है।
 
O Brahman! Due to these reasons this direction is called 'Purva'; because in the very distant past this direction was covered by the gods, hence it is called the original direction of all. 8 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)