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mahabharat 5.108.7: हे ब्रह्मर्षि! देवी लक्ष्मी का उद्गम पूर्व दिशा है। यहीं पर सर्वप्रथम इंद्र का देवताओं के सम्राट के रूप में अभिषेक हुआ था और यहीं पर देवताओं ने तपस्या की थी। 7.   |   mahabharat अध्याय 5.108: गरुड़का गालवसे पूर्व दिशाका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 108: गरुड़का गालवसे पूर्व दिशाका वर्णन करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.108.7 
अदोमूला सुराणां श्रीर्यत्र शक्रोऽभ्यषिच्यत।
सुरराज्येन विप्रर्षे देवैश्चात्र तपश्चितम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे ब्रह्मर्षि! देवी लक्ष्मी का उद्गम पूर्व दिशा है। यहीं पर सर्वप्रथम इंद्र का देवताओं के सम्राट के रूप में अभिषेक हुआ था और यहीं पर देवताओं ने तपस्या की थी। 7.
 
O Brahmarshi! The origin of the goddess Lakshmi is the east direction. It was here that Indra was first anointed as the emperor of the gods and it was in this direction that the gods performed penance. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)