Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.108.3-5: हे ब्राह्मण! जिस दिशा में सम्पूर्ण जगत् की रचना और प्रभाव करने वाले भगवान् सूर्यदेव सबसे पहले उदय होते हैं, जिस दिशा में संध्याकाल में साधुजन तप करते हैं, जिस दिशा में सम्पूर्ण जगत् में व्याप्त ज्ञान सबसे पहले प्राप्त होता है (गायत्री मंत्र के जप से), जिस दिशा में धर्म के दोनों नेत्र चन्द्रमा और सूर्य सबसे पहले उदय होते हैं और जहाँ धर्म की स्थापना हुई है (पूर्वाभिमुख होकर धार्मिक अनुष्ठान करने के कारण) तथा जिस दिशा में यज्ञोपवीत अर्पित करने के बाद आहुति सब दिशाओं में फैलती है, वही पूर्व दिशा दिन और सूर्य के मार्ग का द्वार है। | mahabharat अध्याय 5.108: गरुड़का गालवसे पूर्व दिशाका वर्णन करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे ब्राह्मण! जिस दिशा में सम्पूर्ण जगत् की रचना और प्रभाव करने वाले भगवान् सूर्यदेव सबसे पहले उदय होते हैं, जिस दिशा में संध्याकाल में साधुजन तप करते हैं, जिस दिशा में सम्पूर्ण जगत् में व्याप्त ज्ञान सबसे पहले प्राप्त होता है (गायत्री मंत्र के जप से), जिस दिशा में धर्म के दोनों नेत्र चन्द्रमा और सूर्य सबसे पहले उदय होते हैं और जहाँ धर्म की स्थापना हुई है (पूर्वाभिमुख होकर धार्मिक अनुष्ठान करने के कारण) तथा जिस दिशा में यज्ञोपवीत अर्पित करने के बाद आहुति सब दिशाओं में फैलती है, वही पूर्व दिशा दिन और सूर्य के मार्ग का द्वार है।
O Brahmin! The direction in which the Lord Sun, who creates and influences the entire universe, rises first, the direction in which the Sadhus perform penance during the evening, the direction in which the wisdom, which has pervaded the entire universe, is first attained (by chanting Gayatri Mantra), the direction in which the Moon and the Sun, the two eyes of Dharma, rise first and where Dharma has been established (due to religious rituals being performed usually facing east), and the direction in which after offering the sacred sacrifice, the offering spreads in all directions, this same east direction is the door to the path of day and the Sun.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥