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mahabharat 5.108.18: मुझे भगवान विष्णु को प्रसन्न करने वाला कार्य करना है, जिनकी आज्ञा में मैं हूँ; अतः हे गालव, मुझे बताइए कि मैं पूर्व दिशा की ओर जाऊँ या दूसरी दिशा का वर्णन भी सुनूँ॥ 18॥   |   mahabharat अध्याय 5.108: गरुड़का गालवसे पूर्व दिशाका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 108: गरुड़का गालवसे पूर्व दिशाका वर्णन करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.108.18 
प्रियं कार्यं हि मे तस्य यस्यास्मि वचने स्थित:।
ब्रूहि गालव यास्यामि शृणु चाप्यपरां दिशम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
मुझे भगवान विष्णु को प्रसन्न करने वाला कार्य करना है, जिनकी आज्ञा में मैं हूँ; अतः हे गालव, मुझे बताइए कि मैं पूर्व दिशा की ओर जाऊँ या दूसरी दिशा का वर्णन भी सुनूँ॥ 18॥
 
I must carry out the work which pleases Lord Vishnu, under whose command I am; therefore, tell me, Galava, should I proceed towards the east or listen to the description of the other direction also.॥ 18॥
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि गालवचरिते अष्टाधिकशततमोऽध्याय:॥ १०८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें गालवचरित्रविषयक एक सौ आठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)