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mahabharat 5.107.2: चिंता और शोक में डूबे रहने के कारण वे पाण्डुवर्ण के हो गए। उनके शरीर में केवल हड्डियाँ और त्वचा ही शेष रह गई थी। सुयोधन! अत्यन्त शोक करते हुए और चिंता की अग्नि से जलते हुए गालव मुनि दुःख से विलाप करने लगे-॥2॥   |   mahabharat अध्याय 5.107: गालवकी चिन्ता और गरुड़का आकर उन्हें आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 107: गालवकी चिन्ता और गरुड़का आकर उन्हें आश्वासन देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.107.2 
त्वगस्थिभूतो हरिणश्चिन्ताशोकपरायण:।
शोचमानोऽतिमात्रं स दह्यमानश्च मन्युना।
गालवो दु:खितो दु:खाद् विललाप सुयोधन॥ २॥
 
 
अनुवाद
चिंता और शोक में डूबे रहने के कारण वे पाण्डुवर्ण के हो गए। उनके शरीर में केवल हड्डियाँ और त्वचा ही शेष रह गई थी। सुयोधन! अत्यन्त शोक करते हुए और चिंता की अग्नि से जलते हुए गालव मुनि दुःख से विलाप करने लगे-॥2॥
 
Due to being immersed in worry and grief, he became of Panduvarna. Only bones and skin were left in his body. Suyodhana! Grieving greatly and burning with the fire of worry, Gaalav Muni started wailing in sorrow -॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)