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स भवानेतु गच्छाव नयिष्ये त्वां यथासुखम्।
देशं पारं पृथिव्या वा गच्छ गालव मा चिरम्॥ १९॥
अनुवाद
तो आओ, हम दोनों चलें। गालव! मैं तुम्हें पृथ्वी के नीचे और समुद्र के पार एक देश में प्रसन्नतापूर्वक ले चलूँगा। आओ, देर न करो।'
‘So come, let us both go. Galav! I will take you happily to a country which is beneath the earth and across the ocean. Come, do not delay.'
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि गालवचरिते सप्ताधिकशततमोऽध्याय:॥ १०७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें गालवचरित्रविषयक एक सौ सातवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥