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mahabharat 5.107.15: मैं भक्तिपूर्वक उन अविनाशी योगी भगवान विष्णु का दर्शन करना चाहता हूँ, जिनकी कृपा से समस्त देवता और दानव पर्याप्त भोग प्राप्त करते हैं।’ ॥15॥   |   mahabharat अध्याय 5.107: गालवकी चिन्ता और गरुड़का आकर उन्हें आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 107: गालवकी चिन्ता और गरुड़का आकर उन्हें आश्वासन देना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.107.15 
भोगा यस्मात् प्रतिष्ठन्ते व्याप्य सर्वान् सुरासुरान्।
प्रणतो द्रष्टुमिच्छामि कृष्णं योगिनमव्ययम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
मैं भक्तिपूर्वक उन अविनाशी योगी भगवान विष्णु का दर्शन करना चाहता हूँ, जिनकी कृपा से समस्त देवता और दानव पर्याप्त भोग प्राप्त करते हैं।’ ॥15॥
 
I wish to see with devotion that indestructible Yogi Lord Vishnu, by whose grace all the gods and demons get sufficient enjoyments.' ॥15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)