Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.107.11: दरिद्र और पापी मनुष्य का जीवन वास्तव में जीवन नहीं है। पापी मनुष्य अपने परिवार का पालन-पोषण कैसे कर सकता है? पापी (दरिद्र) मनुष्य अपने पुण्य कर्मों का नाश करके स्वयं भी नष्ट हो जाता है॥ 11॥ | mahabharat अध्याय 5.107: गालवकी चिन्ता और गरुड़का आकर उन्हें आश्वासन देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दरिद्र और पापी मनुष्य का जीवन वास्तव में जीवन नहीं है। पापी मनुष्य अपने परिवार का पालन-पोषण कैसे कर सकता है? पापी (दरिद्र) मनुष्य अपने पुण्य कर्मों का नाश करके स्वयं भी नष्ट हो जाता है॥ 11॥
‘The life of a poor and sinful man is not really life. How can a sinful man support his family? A sinful (poor) man, destroying his good deeds, is sure to perish himself.॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥