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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 106: नारदजीका दुर्योधनको समझाते हुए धर्मराजके द्वारा विश्वामित्रजीकी परीक्षा तथा गालवके विश्वामित्रसे गुरुदक्षिणा माँगनेके लिये हठका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.106.8 
विश्वामित्रं तपस्यन्तं धर्मो जिज्ञासया पुरा।
अभ्यगच्छत् स्वयं भूत्वा वसिष्ठो भगवानृषि:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
इससे पहले, धर्मराज स्वयं महर्षि भगवान वशिष्ठ का रूप धारण करके ध्यान में मग्न विश्वामित्र की परीक्षा लेने के लिए उनके पास आये।
 
Earlier, Dharmaraj himself took the form of the great sage Lord Vasishtha and came to Viswamitra who was engaged in meditation to test him. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)