Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.106.6: हे कुरुणानन्द! मैं देख रहा हूँ कि तुम्हें अपने मित्रों की सलाह सुनने की विशेष आवश्यकता है; इसलिए तुम्हें किसी भी बात पर हठ नहीं करना चाहिए। हठ का परिणाम बहुत भयानक होता है ॥6॥ | mahabharat अध्याय 5.106: नारदजीका दुर्योधनको समझाते हुए धर्मराजके द्वारा विश्वामित्रजीकी परीक्षा तथा गालवके विश्वामित्रसे गुरुदक्षिणा माँगनेके लिये हठका वर्णन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रोतव्यमपि पश्यामि सुहृदां कुरुनन्दन।
न कर्तव्यश्च निर्बन्धो निर्बन्धो हि सुदारुण:॥ ६॥
अनुवाद
हे कुरुणानन्द! मैं देख रहा हूँ कि तुम्हें अपने मित्रों की सलाह सुनने की विशेष आवश्यकता है; इसलिए तुम्हें किसी भी बात पर हठ नहीं करना चाहिए। हठ का परिणाम बहुत भयानक होता है ॥6॥
O son of Kuruṇānanda! I see that you have a special need to listen to the advice of your friends; therefore you should not be obstinate about any one thing. The consequences of insistence are very terrible. ॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥