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mahabharat 5.106.27: गालव! मुझे चन्द्रमा के समान श्वेत, एक ओर से काले रंग के कान वाले आठ सौ घोड़े दो। जाओ, विलम्ब मत करो॥27॥   |   mahabharat अध्याय 5.106: नारदजीका दुर्योधनको समझाते हुए धर्मराजके द्वारा विश्वामित्रजीकी परीक्षा तथा गालवके विश्वामित्रसे गुरुदक्षिणा माँगनेके लिये हठका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 106: नारदजीका दुर्योधनको समझाते हुए धर्मराजके द्वारा विश्वामित्रजीकी परीक्षा तथा गालवके विश्वामित्रसे गुरुदक्षिणा माँगनेके लिये हठका वर्णन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.106.27 
एकत: श्यामकर्णानां हयानां चन्द्रवर्चसाम्।
अष्टौ शतानि मे देहि गच्छ गालव मा चिरम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
गालव! मुझे चन्द्रमा के समान श्वेत, एक ओर से काले रंग के कान वाले आठ सौ घोड़े दो। जाओ, विलम्ब मत करो॥27॥
 
‘Gaalava! Give me eight hundred horses as white as the moon, with one ear of black colour on one side. Go, don't delay.'॥ 27॥
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि गालवचरिते षडधिकशततमोऽध्याय:॥ १०६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें गालवचरित्रविषयक एक सौ छठाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०६॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)