श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 106: नारदजीका दुर्योधनको समझाते हुए धर्मराजके द्वारा विश्वामित्रजीकी परीक्षा तथा गालवके विश्वामित्रसे गुरुदक्षिणा माँगनेके लिये हठका वर्णन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  5.106.26 
निर्बन्धतस्तु बहुशो गालवस्य तपस्विन:।
किंचिदागतसंरम्भो विश्वामित्रोऽब्रवीदिदम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
तपस्वी गालव के आग्रह से विश्वामित्र क्रोधित हो गए, इसलिए उन्होंने इस प्रकार कहा -
 
Vishwamitra became angry at the insistence of the ascetic Galava; therefore, he said thus -
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)