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mahabharat 5.106.24: भगवान विश्वामित्र गालव की सेवा और देखभाल के कारण उनके वश में आ गए थे। अतः उनका उपकार समझकर विश्वामित्र ने उनसे बार-बार कहा - 'जाओ, जाओ।'   |   mahabharat अध्याय 5.106: नारदजीका दुर्योधनको समझाते हुए धर्मराजके द्वारा विश्वामित्रजीकी परीक्षा तथा गालवके विश्वामित्रसे गुरुदक्षिणा माँगनेके लिये हठका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.106.24 
जानानस्तेन भगवाञ्जित: शुश्रूषणेन वै।
विश्वामित्रस्तमसकृद् गच्छ गच्छेत्यचोदयत्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
भगवान विश्वामित्र गालव की सेवा और देखभाल के कारण उनके वश में आ गए थे। अतः उनका उपकार समझकर विश्वामित्र ने उनसे बार-बार कहा - 'जाओ, जाओ।'
 
Lord Vishwamitra had come under the control of Galav due to his service and care. Therefore, understanding his favor, Vishwamitra repeatedly told him - 'Go, go'.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)