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mahabharat 5.106.22: माननीय! दक्षिणा देकर किया गया कार्य ही सफल होता है। दक्षिणा देने वाले को ही सफलता मिलती है।   |   mahabharat अध्याय 5.106: नारदजीका दुर्योधनको समझाते हुए धर्मराजके द्वारा विश्वामित्रजीकी परीक्षा तथा गालवके विश्वामित्रसे गुरुदक्षिणा माँगनेके लिये हठका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 106: नारदजीका दुर्योधनको समझाते हुए धर्मराजके द्वारा विश्वामित्रजीकी परीक्षा तथा गालवके विश्वामित्रसे गुरुदक्षिणा माँगनेके लिये हठका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.106.22 
दक्षिणाभिरुपेतं हि कर्म सिद्धॺति मानद।
दक्षिणानां हि दाता वै अपवर्गेण युज्यते॥ २२॥
 
 
अनुवाद
माननीय! दक्षिणा देकर किया गया कार्य ही सफल होता है। दक्षिणा देने वाले को ही सफलता मिलती है।
 
‘Honourable! Only the work done with dakshina (gift) is successful. Only the person who gives dakshina (gift) gets success.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)