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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 106: नारदजीका दुर्योधनको समझाते हुए धर्मराजके द्वारा विश्वामित्रजीकी परीक्षा तथा गालवके विश्वामित्रसे गुरुदक्षिणा माँगनेके लिये हठका वर्णन
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श्लोक 18
श्लोक
5.106.18
क्षत्रभावादपगतो ब्राह्मणत्वमुपागत:।
धर्मस्य वचनात् प्रीतो विश्वामित्रस्तदाभवत्॥ १८॥
अनुवाद
क्षत्रिय पद से उठकर ब्राह्मण पद को प्राप्त हुए विश्वामित्र उस समय धर्म के वचनों से अत्यन्त प्रसन्न हुए ॥18॥
Vishwamitra, who had risen from Kshatriya status and attained Brahmin status, was very happy at that time with the words of Dharma. 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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