श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 106: नारदजीका दुर्योधनको समझाते हुए धर्मराजके द्वारा विश्वामित्रजीकी परीक्षा तथा गालवके विश्वामित्रसे गुरुदक्षिणा माँगनेके लिये हठका वर्णन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.106.15 
अथ वर्षशते पूर्णे धर्म: पुनरुपागमत्।
वासिष्ठं वेषमास्थाय कौशिकं भोजनेप्सया॥ १५॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर सौ वर्ष पूर्ण होने पर धर्मदेव वशिष्ठ पुनः मुनिका वेश धारण करके आहार की इच्छा से विश्वामित्र मुनि के पास आये ॥15॥
 
Subsequently, after completion of hundred years, Dharmadev Vashishtha again came to Vishwamitra Muni in the guise of Munika with the desire of food. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)