श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 106: नारदजीका दुर्योधनको समझाते हुए धर्मराजके द्वारा विश्वामित्रजीकी परीक्षा तथा गालवके विश्वामित्रसे गुरुदक्षिणा माँगनेके लिये हठका वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.106.11 
अन्नं तेन तदा भुक्तमन्यैर्दत्तं तपस्विभि:।
अथ गृह्यान्नमत्युष्णं विश्वामित्रोऽप्युपागमत्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जब वे अन्य तपस्वी ऋषियों द्वारा दिया हुआ भोजन खा चुके, तब विश्वामित्र भी उनके लिए बहुत गरम भोजन लेकर आये ॥11॥
 
When he had eaten the food offered by the other ascetic sages, Visvamitra also came to serve him with very hot food. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)