Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.105.6: अब चूँकि सर्प दीर्घायु हो गया है, अतः मैं उसके स्थान पर किसी अन्य को हानि नहीं पहुँचा सकता। हे देवराज! आप अत्याचार अपनाकर मनमाना खेल खेल रहे हैं। | mahabharat अध्याय 5.105: भगवान् विष्णुके द्वारा गरुड़का गर्वभंजन तथा दुर्योधनद्वारा कण्व मुनिके उपदेशकी अवहेलना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अब चूँकि सर्प दीर्घायु हो गया है, अतः मैं उसके स्थान पर किसी अन्य को हानि नहीं पहुँचा सकता। हे देवराज! आप अत्याचार अपनाकर मनमाना खेल खेल रहे हैं।
Now that the serpent has attained a long life, I cannot harm anyone else in his stead. O king of gods! You are playing arbitrary games by adopting tyranny. 6.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥