Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.105.5: हे प्रभु! मैंने उस विशाल सर्प को अपने भोजन के लिए चुना था। मैंने उसके लिए समय भी निश्चित कर दिया था और मुझे अपने विशाल परिवार को उससे भोजन कराना था। ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 5.105: भगवान‍् विष्णुके द्वारा गरुड़का गर्वभंजन तथा दुर्योधनद्वारा कण्व मुनिके उपदेशकी अवहेलना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 105: भगवान‍् विष्णुके द्वारा गरुड़का गर्वभंजन तथा दुर्योधनद्वारा कण्व मुनिके उपदेशकी अवहेलना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  5.105.5 
वृतश्चैष महानाग: स्थापित: समयश्च मे।
अनेन च मया देव भर्तव्य: प्रसवो महान्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! मैंने उस विशाल सर्प को अपने भोजन के लिए चुना था। मैंने उसके लिए समय भी निश्चित कर दिया था और मुझे अपने विशाल परिवार को उससे भोजन कराना था। ॥5॥
 
O God! I had chosen that great snake for my meal. I had also fixed a time for it and I had to feed my large family with it. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)