Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.105.38: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! कण्व की बात सुनकर दुर्योधन की भौंहें तन गईं। उसने गहरी साँस ली और राधापुत्र कर्ण की ओर देखकर जोर-जोर से हँसने लगा। 38. | mahabharat अध्याय 5.105: भगवान् विष्णुके द्वारा गरुड़का गर्वभंजन तथा दुर्योधनद्वारा कण्व मुनिके उपदेशकी अवहेलना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! कण्व की बात सुनकर दुर्योधन की भौंहें तन गईं। उसने गहरी साँस ली और राधापुत्र कर्ण की ओर देखकर जोर-जोर से हँसने लगा। 38.
Vaishampayana says - Janamejaya! On hearing Kanva's statement, Duryodhan's eyebrows rose. He took a deep breath and started laughing loudly looking at Radha's son Karna. 38.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥