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mahabharat 5.105.37: महातपस्वी नारदजी ने उस समय भगवान विष्णु की महानता का प्रत्यक्ष दर्शन किया था। चक्र और गदा धारण करने वाले भगवान विष्णु ही 'श्रीकृष्ण' हैं।   |   mahabharat अध्याय 5.105: भगवान‍् विष्णुके द्वारा गरुड़का गर्वभंजन तथा दुर्योधनद्वारा कण्व मुनिके उपदेशकी अवहेलना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.105.37 
प्रत्यक्षदर्शी सर्वस्य नारदोऽयं महातपा:।
माहात्म्यस्य तदा विष्णो: सोऽयं चक्रगदाधर:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
महातपस्वी नारदजी ने उस समय भगवान विष्णु की महानता का प्रत्यक्ष दर्शन किया था। चक्र और गदा धारण करने वाले भगवान विष्णु ही 'श्रीकृष्ण' हैं।
 
This great ascetic Naradji had directly seen the greatness of Lord Vishnu at that time. Lord Vishnu who holds the disc and mace is 'Shri Krishna'.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)