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mahabharat 5.105.34: वीरों में श्रेष्ठ पराक्रमी भीम वायु के पुत्र हैं। अर्जुन भी इन्द्र के पुत्र हैं। ये दोनों युद्ध में एक साथ मिलकर किसका वध नहीं करेंगे?॥ 34॥   |   mahabharat अध्याय 5.105: भगवान‍् विष्णुके द्वारा गरुड़का गर्वभंजन तथा दुर्योधनद्वारा कण्व मुनिके उपदेशकी अवहेलना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.105.34 
भीम: प्रहरतां श्रेष्ठो वायुपुत्रो महाबल:।
धनंजयश्चेन्द्रसुतो न हन्यातां तु कं रणे॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
वीरों में श्रेष्ठ पराक्रमी भीम वायु के पुत्र हैं। अर्जुन भी इन्द्र के पुत्र हैं। ये दोनों युद्ध में एक साथ मिलकर किसका वध नहीं करेंगे?॥ 34॥
 
The mighty Bhima, the best of warriors, is the son of Vayu. Arjuna is also the son of Indra. Who will these two not kill together in battle?॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)