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mahabharat 5.105.33: कण्व मुनि कहते हैं - गान्धारी नन्दन वत्स दुर्योधन! इसी प्रकार तुम भी तब तक अपना जीवन जारी रखो जब तक कि तुम उन वीर पाण्डवों को युद्धभूमि में अपने सामने न पा लो॥33॥   |   mahabharat अध्याय 5.105: भगवान‍् विष्णुके द्वारा गरुड़का गर्वभंजन तथा दुर्योधनद्वारा कण्व मुनिके उपदेशकी अवहेलना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.105.33 
कण्व उवाच
तथा त्वमपि गान्धारे यावत् पाण्डुसुतान् रणे।
नासादयसि तान् वीरांस्तावज्जीवसि पुत्रक॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
कण्व मुनि कहते हैं - गान्धारी नन्दन वत्स दुर्योधन! इसी प्रकार तुम भी तब तक अपना जीवन जारी रखो जब तक कि तुम उन वीर पाण्डवों को युद्धभूमि में अपने सामने न पा लो॥33॥
 
Kanva Muni says – Gandhari Nandan Vatsa Duryodhan! Similarly, you too continue your life until you find those brave Pandavas in front of you in the battlefield. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)