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mahabharat 5.105.30: जब गरुड़ ने ऐसा कहा, तब भगवान ने कृपापूर्वक उसकी ओर देखा और स्नेहपूर्वक कहा - 'फिर कभी इस प्रकार अभिमान मत करना।' ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 5.105: भगवान‍् विष्णुके द्वारा गरुड़का गर्वभंजन तथा दुर्योधनद्वारा कण्व मुनिके उपदेशकी अवहेलना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.105.30 
ततश्चक्रे स भगवान‍् प्रसादं वै गरुत्मत:।
मैवं भूय इति स्नेहात् तदा चैनमुवाच ह॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
जब गरुड़ ने ऐसा कहा, तब भगवान ने कृपापूर्वक उसकी ओर देखा और स्नेहपूर्वक कहा - 'फिर कभी इस प्रकार अभिमान मत करना।' ॥30॥
 
When Garuda said this, the Lord looked at him with kindness and said to him affectionately, 'Never be proud like this again.' ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)