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mahabharat 5.105.27: हे प्रभु! आपकी इस भुजा से, जो जगत् के सारस्वरूप है और जिसे आपने मुझ पर सहज ही रखा है, मैं भूमि पर कुचला गया हूँ॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 5.105: भगवान‍् विष्णुके द्वारा गरुड़का गर्वभंजन तथा दुर्योधनद्वारा कण्व मुनिके उपदेशकी अवहेलना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.105.27 
भगवल्लोँकसारस्य सदृशेन वपुष्मता।
भुजेन स्वैरमुक्तेन निष्पिष्टोऽस्मि महीतले॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! आपकी इस भुजा से, जो जगत् के सारस्वरूप है और जिसे आपने मुझ पर सहज ही रखा है, मैं भूमि पर कुचला गया हूँ॥ 27॥
 
O Lord! I have been crushed to the ground by this arm of Yours which is like the embodied essence of the universe and which You have naturally placed upon me.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)