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mahabharat 5.105.23: गरुड़ को यह ज्ञात हुआ कि उस एक भुजा का भार पर्वतों सहित सम्पूर्ण पृथ्वी के भार के बराबर है ॥23॥   |   mahabharat अध्याय 5.105: भगवान‍् विष्णुके द्वारा गरुड़का गर्वभंजन तथा दुर्योधनद्वारा कण्व मुनिके उपदेशकी अवहेलना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.105.23 
यावान् हि भार: कृत्स्नाया: पृथिव्या: पर्वतै: सह।
एकस्या देहशाखायास्तावद् भारममन्यत॥ २३॥
 
 
अनुवाद
गरुड़ को यह ज्ञात हुआ कि उस एक भुजा का भार पर्वतों सहित सम्पूर्ण पृथ्वी के भार के बराबर है ॥23॥
 
Garuda realized that the weight of that one arm was equal to the weight of the entire earth including its mountains. ॥23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)