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mahabharat 5.105.21: ठीक है, पहले तुम मेरी दाहिनी भुजा का ही भार उठाओ। यदि तुम इसे ही उठा लोगे तो तुम्हारी सारी आत्म-प्रशंसा सफल मानी जाएगी।॥21॥   |   mahabharat अध्याय 5.105: भगवान‍् विष्णुके द्वारा गरुड़का गर्वभंजन तथा दुर्योधनद्वारा कण्व मुनिके उपदेशकी अवहेलना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.105.21 
इमं तावन्ममैकं त्वं बाहुं सव्येतरं वह।
यद्येनं धारयस्येकं सफलं ते विकत्थितम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
ठीक है, पहले तुम मेरी दाहिनी भुजा का ही भार उठाओ। यदि तुम इसे ही उठा लोगे तो तुम्हारी सारी आत्म-प्रशंसा सफल मानी जाएगी।॥21॥
 
Okay, first you bear the weight of my right arm only. If you bear this one only then all your self-praise will be considered successful.'॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)