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mahabharat 5.105.20: समस्त त्रिलोकी मिलकर भी मेरे शरीर का भार सहन नहीं कर सकती। मैं स्वयं भी अपने शरीर को धारण करता हूँ और आपको भी धारण करता हूँ॥ 20॥   |   mahabharat अध्याय 5.105: भगवान‍् विष्णुके द्वारा गरुड़का गर्वभंजन तथा दुर्योधनद्वारा कण्व मुनिके उपदेशकी अवहेलना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.105.20 
त्रैलोक्यमपि मे कृत्स्नमशक्तं देहधारणे।
अहमेवात्मनाऽऽत्मानं वहामि त्वां च धारये॥ २०॥
 
 
अनुवाद
समस्त त्रिलोकी मिलकर भी मेरे शरीर का भार सहन नहीं कर सकती। मैं स्वयं भी अपने शरीर को धारण करता हूँ और आपको भी धारण करता हूँ॥ 20॥
 
‘The entire Triloki combined is unable to bear the weight of my body. I carry myself and hold you as well.॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)