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mahabharat 5.105.15: वासव! मेरी अवज्ञा करके मेरा भोजन छीन लेने से मेरा सारा अभिमान नष्ट हो गया है और इसका कारण आप और श्री हरि हैं।   |   mahabharat अध्याय 5.105: भगवान‍् विष्णुके द्वारा गरुड़का गर्वभंजन तथा दुर्योधनद्वारा कण्व मुनिके उपदेशकी अवहेलना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.105.15 
अवज्ञाय तु यत् तेऽहं भोजनाद् व्यपरोपित:।
तेन मे गौरवं नष्टं त्वत्तश्चास्माच्च वासव॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वासव! मेरी अवज्ञा करके मेरा भोजन छीन लेने से मेरा सारा अभिमान नष्ट हो गया है और इसका कारण आप और श्री हरि हैं।
 
Vasava! By disobeying me and taking away my food, all my pride has been destroyed and the reason behind this are you and Shri Hari.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)