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mahabharat 5.105.14: मेरे सिवा और कौन भगवान विष्णु का महान भार उठा सकता है? मुझसे अधिक बलवान कौन है? मैं परम बलवान होते हुए भी अपने बन्धुओं सहित भगवान विष्णु का भार उठाता हूँ॥ 14॥   |   mahabharat अध्याय 5.105: भगवान‍् विष्णुके द्वारा गरुड़का गर्वभंजन तथा दुर्योधनद्वारा कण्व मुनिके उपदेशकी अवहेलना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.105.14 
कोऽन्यो भार सहो ह्यस्ति कोऽन्योऽस्ति बलवत्तर:।
मया योऽहं विशिष्ट: सन् वहामीमं सबान्धवम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
मेरे सिवा और कौन भगवान विष्णु का महान भार उठा सकता है? मुझसे अधिक बलवान कौन है? मैं परम बलवान होते हुए भी अपने बन्धुओं सहित भगवान विष्णु का भार उठाता हूँ॥ 14॥
 
Who other than me can bear the great burden of Lord Vishnu? Who is stronger than me? Even though I am the most powerful, I bear the burden of Lord Vishnu along with my relatives.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)