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mahabharat 5.105.13: तथापि, चूँकि मैं रथ की ध्वजा में निवास करता हूँ और आपके छोटे भाई (विष्णु) की सेवा करता हूँ तथा उन्हें ले जाता हूँ, इसलिए आप मेरी उपेक्षा करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 5.105: भगवान‍् विष्णुके द्वारा गरुड़का गर्वभंजन तथा दुर्योधनद्वारा कण्व मुनिके उपदेशकी अवहेलना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.105.13 
यत् तु ध्वजस्थानगतो यत्नात् परिचराम्यहम्।
वहामि चैवानुजं ते तेन मामवमन्यसे॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तथापि, चूँकि मैं रथ की ध्वजा में निवास करता हूँ और आपके छोटे भाई (विष्णु) की सेवा करता हूँ तथा उन्हें ले जाता हूँ, इसलिए आप मेरी उपेक्षा करते हैं।
 
However, because I reside in the flag of the chariot and carefully serve and carry your younger brother (Vishnu), you ignore me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)