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mahabharat 5.105.10: मेरी माता भी प्रजापति दक्ष की पुत्री हैं। मेरे पिता भी महर्षि कश्यप हैं। मैं बिना किसी प्रयास के ही समस्त लोकों का भार वहन कर सकता हूँ॥10॥   |   mahabharat अध्याय 5.105: भगवान‍् विष्णुके द्वारा गरुड़का गर्वभंजन तथा दुर्योधनद्वारा कण्व मुनिके उपदेशकी अवहेलना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.105.10 
ममापि दक्षस्य सुता जननी कश्यप: पिता।
अहमप्युत्सहे लोकान् समन्ताद् वोढुमञ्जसा॥ १०॥
 
 
अनुवाद
मेरी माता भी प्रजापति दक्ष की पुत्री हैं। मेरे पिता भी महर्षि कश्यप हैं। मैं बिना किसी प्रयास के ही समस्त लोकों का भार वहन कर सकता हूँ॥10॥
 
My mother is also the daughter of Prajapati Daksha. My father is also Maharishi Kashyap. I can bear the burden of all the worlds without any effort.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)