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mahabharat 5.104.d1: कण्व मुनि कहते हैं- कुरुनन्दन! मातलि की बातें सुनकर परम बुद्धिमान पुत्र ने नागराज आर्य से कहा।   |   mahabharat अध्याय 5.104: नारदजीका नागराज आर्यकके सम्मुख सुमुखके साथ मातलिकी कन्याके विवाहका प्रस्ताव एवं मातलिका नारदजी, सुमुख एवं आर्यकके साथ इन्द्रके पास आकर उनके द्वारा सुमुखको दीर्घायु प्रदान कराना तथा सुमुख-गुणकेशी-विवाह   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 104: नारदजीका नागराज आर्यकके सम्मुख सुमुखके साथ मातलिकी कन्याके विवाहका प्रस्ताव एवं मातलिका नारदजी, सुमुख एवं आर्यकके साथ इन्द्रके पास आकर उनके द्वारा सुमुखको दीर्घायु प्रदान कराना तथा सुमुख-गुणकेशी-विवाह  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  5.104.d1 
(कण्व उवाच
मातलेर्वचनं श्रुत्वा नारदो मुनिसत्तम:।
अब्रवीन्नागराजानमार्यकं कुरुनन्दन॥ )
 
 
अनुवाद
कण्व मुनि कहते हैं- कुरुनन्दन! मातलि की बातें सुनकर परम बुद्धिमान पुत्र ने नागराज आर्य से कहा।
 
Kanva Muni says- Kurunandan! Hearing Matali's words, the most intelligent son said to Nagraj Arya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)