Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.104.6: हे दिव्य तेज वाले सर्पराज! मातलि आपकी पुत्री के लिए वर ढूँढ़ने हेतु तीनों लोकों में भ्रमण करते हुए यहाँ आए हैं। उन्होंने आपके पौत्र सुमुख को अपनी पुत्री के लिए उपयुक्त वर पाया है; उन्होंने उसे चुन लिया है। | mahabharat अध्याय 5.104: नारदजीका नागराज आर्यकके सम्मुख सुमुखके साथ मातलिकी कन्याके विवाहका प्रस्ताव एवं मातलिका नारदजी, सुमुख एवं आर्यकके साथ इन्द्रके पास आकर उनके द्वारा सुमुखको दीर्घायु प्रदान कराना तथा सुमुख-गुणकेशी-विवाह । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे दिव्य तेज वाले सर्पराज! मातलि आपकी पुत्री के लिए वर ढूँढ़ने हेतु तीनों लोकों में भ्रमण करते हुए यहाँ आए हैं। उन्होंने आपके पौत्र सुमुख को अपनी पुत्री के लिए उपयुक्त वर पाया है; उन्होंने उसे चुन लिया है।
O King of Snakes, who has divine radiance! Matali has come here after roaming in all the three worlds with great efforts to find a groom for your daughter. He found your grandson Sumukh to be a suitable husband for his daughter; he has chosen him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥