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mahabharat 5.104.30: नारद और आर्यक दोनों कृतज्ञ हुए और महाबली भगवान् का पूजन करके सुखपूर्वक अपने-अपने स्थान को चले गए ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 5.104: नारदजीका नागराज आर्यकके सम्मुख सुमुखके साथ मातलिकी कन्याके विवाहका प्रस्ताव एवं मातलिका नारदजी, सुमुख एवं आर्यकके साथ इन्द्रके पास आकर उनके द्वारा सुमुखको दीर्घायु प्रदान कराना तथा सुमुख-गुणकेशी-विवाह   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 104: नारदजीका नागराज आर्यकके सम्मुख सुमुखके साथ मातलिकी कन्याके विवाहका प्रस्ताव एवं मातलिका नारदजी, सुमुख एवं आर्यकके साथ इन्द्रके पास आकर उनके द्वारा सुमुखको दीर्घायु प्रदान कराना तथा सुमुख-गुणकेशी-विवाह  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  5.104.30 
नारदस्त्वार्यकश्चैव कृतकार्यौ मुदा युतौ।
अभिजग्मतुरभ्यर्च्य देवराजं महाद्युतिम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
नारद और आर्यक दोनों कृतज्ञ हुए और महाबली भगवान् का पूजन करके सुखपूर्वक अपने-अपने स्थान को चले गए ॥30॥
 
Both Narad and Aryak were grateful and went to their respective places happily after worshiping the mighty God. 30॥
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि मातलिवरान्वेषणे चतुरधिकशततमोऽध्याय:॥ १०४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें मातलिके द्वारा वरका खोजविषयक एक सौ चारवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०४॥

[दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल ३१ श्लोक हैं।]
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)