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mahabharat 5.104.29: इन्द्र का वरदान पाकर सुमुख का चेहरा प्रसन्नता से खिल उठा। विवाह करके वह अपनी इच्छानुसार अपने घर लौट गया।   |   mahabharat अध्याय 5.104: नारदजीका नागराज आर्यकके सम्मुख सुमुखके साथ मातलिकी कन्याके विवाहका प्रस्ताव एवं मातलिका नारदजी, सुमुख एवं आर्यकके साथ इन्द्रके पास आकर उनके द्वारा सुमुखको दीर्घायु प्रदान कराना तथा सुमुख-गुणकेशी-विवाह   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 104: नारदजीका नागराज आर्यकके सम्मुख सुमुखके साथ मातलिकी कन्याके विवाहका प्रस्ताव एवं मातलिका नारदजी, सुमुख एवं आर्यकके साथ इन्द्रके पास आकर उनके द्वारा सुमुखको दीर्घायु प्रदान कराना तथा सुमुख-गुणकेशी-विवाह  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  5.104.29 
लब्ध्वा वरं तु सुमुख: सुमुख: सम्बभूव ह।
कृतदारो यथाकामं जगाम च गृहान् प्रति॥ २९॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र का वरदान पाकर सुमुख का चेहरा प्रसन्नता से खिल उठा। विवाह करके वह अपनी इच्छानुसार अपने घर लौट गया।
 
Sumukh's face lit up with joy after receiving Indra's boon. After getting married, he went back to his home as per his wish.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)