श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 104: नारदजीका नागराज आर्यकके सम्मुख सुमुखके साथ मातलिकी कन्याके विवाहका प्रस्ताव एवं मातलिका नारदजी, सुमुख एवं आर्यकके साथ इन्द्रके पास आकर उनके द्वारा सुमुखको दीर्घायु प्रदान कराना तथा सुमुख-गुणकेशी-विवाह  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.104.27 
विष्णुरुवाच
ईशस्त्वं सर्वलोकानां चराणामचराश्च ये।
त्वया दत्तमदत्तं क: कर्तुमुत्सहते विभो॥ २७॥
 
 
अनुवाद
भगवान विष्णु बोले - हे प्रभु! आप सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के समस्त जीव-जन्तुओं के ईश्वर हैं। आपके द्वारा प्रदत्त आयु को नष्ट करने का साहस कौन कर सकता है?॥ 27॥
 
Lord Vishnu said - Lord! You are the God of all living and non-living beings in the entire universe. Who can dare to destroy the life span given by you?॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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