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mahabharat 5.104.26: तब देवराज इंद्र ने गरुड़ के पराक्रम पर विचार करते हुए भगवान विष्णु से कहा, 'कृपया उन्हें दीर्घायु प्रदान करें।'   |   mahabharat अध्याय 5.104: नारदजीका नागराज आर्यकके सम्मुख सुमुखके साथ मातलिकी कन्याके विवाहका प्रस्ताव एवं मातलिका नारदजी, सुमुख एवं आर्यकके साथ इन्द्रके पास आकर उनके द्वारा सुमुखको दीर्घायु प्रदान कराना तथा सुमुख-गुणकेशी-विवाह   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 104: नारदजीका नागराज आर्यकके सम्मुख सुमुखके साथ मातलिकी कन्याके विवाहका प्रस्ताव एवं मातलिका नारदजी, सुमुख एवं आर्यकके साथ इन्द्रके पास आकर उनके द्वारा सुमुखको दीर्घायु प्रदान कराना तथा सुमुख-गुणकेशी-विवाह  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  5.104.26 
पुरंदरोऽथ संचिन्त्य वैनतेयपराक्रमम्।
विष्णुमेवाब्रवीदेनं भवानेव ददात्विति॥ २६॥
 
 
अनुवाद
तब देवराज इंद्र ने गरुड़ के पराक्रम पर विचार करते हुए भगवान विष्णु से कहा, 'कृपया उन्हें दीर्घायु प्रदान करें।'
 
Then Devaraj Indra, contemplating the prowess of Garuda, said to Lord Vishnu, 'Please grant him a long life.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)