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mahabharat 5.104.23: दैवयोग से चतुर्भुज भगवान विष्णु भी वहाँ उपस्थित थे। तत्पश्चात् देवर्षि नारद ने मातलि से संबंधित सम्पूर्ण वृत्तांत सुनाया॥23॥   |   mahabharat अध्याय 5.104: नारदजीका नागराज आर्यकके सम्मुख सुमुखके साथ मातलिकी कन्याके विवाहका प्रस्ताव एवं मातलिका नारदजी, सुमुख एवं आर्यकके साथ इन्द्रके पास आकर उनके द्वारा सुमुखको दीर्घायु प्रदान कराना तथा सुमुख-गुणकेशी-विवाह   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 104: नारदजीका नागराज आर्यकके सम्मुख सुमुखके साथ मातलिकी कन्याके विवाहका प्रस्ताव एवं मातलिका नारदजी, सुमुख एवं आर्यकके साथ इन्द्रके पास आकर उनके द्वारा सुमुखको दीर्घायु प्रदान कराना तथा सुमुख-गुणकेशी-विवाह  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.104.23 
संगत्या तत्र भगवान‍् विष्णुरासीच्चतुर्भुज:।
ततस्तत् सर्वमाचख्यौ नारदो मातलिं प्रति॥ २३॥
 
 
अनुवाद
दैवयोग से चतुर्भुज भगवान विष्णु भी वहाँ उपस्थित थे। तत्पश्चात् देवर्षि नारद ने मातलि से संबंधित सम्पूर्ण वृत्तांत सुनाया॥23॥
 
By providence, four-armed Lord Vishnu was also present there. Thereafter Devarshi Narad narrated the whole story related to Matali. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)