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mahabharat 5.104.22: तत्पश्चात् सुमुखसहित उन सभी तेजस्वी सज्जनों ने स्वर्ग के सिंहासन पर विराजमान परम तेजस्वी इन्द्रदेव को देखा ॥22॥   |   mahabharat अध्याय 5.104: नारदजीका नागराज आर्यकके सम्मुख सुमुखके साथ मातलिकी कन्याके विवाहका प्रस्ताव एवं मातलिका नारदजी, सुमुख एवं आर्यकके साथ इन्द्रके पास आकर उनके द्वारा सुमुखको दीर्घायु प्रदान कराना तथा सुमुख-गुणकेशी-विवाह   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 104: नारदजीका नागराज आर्यकके सम्मुख सुमुखके साथ मातलिकी कन्याके विवाहका प्रस्ताव एवं मातलिका नारदजी, सुमुख एवं आर्यकके साथ इन्द्रके पास आकर उनके द्वारा सुमुखको दीर्घायु प्रदान कराना तथा सुमुख-गुणकेशी-विवाह  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.104.22 
ततस्ते सुमुखं गृह्य सर्व एव महौजस:।
ददृशु: शक्रमासीनं देवराजं महाद्युतिम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सुमुखसहित उन सभी तेजस्वी सज्जनों ने स्वर्ग के सिंहासन पर विराजमान परम तेजस्वी इन्द्रदेव को देखा ॥22॥
 
Thereafter, all those very brilliant gentlemen along with Sumukh saw the most radiant Lord Indra, who was seated on the throne of heaven. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)