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mahabharat 5.104.19: ‘अतः यह सर्पपुत्र मेरे और नारदजी के साथ त्रिलोकीनाथ देवराज इन्द्र के पास जाकर उनसे मिले॥19॥   |   mahabharat अध्याय 5.104: नारदजीका नागराज आर्यकके सम्मुख सुमुखके साथ मातलिकी कन्याके विवाहका प्रस्ताव एवं मातलिका नारदजी, सुमुख एवं आर्यकके साथ इन्द्रके पास आकर उनके द्वारा सुमुखको दीर्घायु प्रदान कराना तथा सुमुख-गुणकेशी-विवाह   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 104: नारदजीका नागराज आर्यकके सम्मुख सुमुखके साथ मातलिकी कन्याके विवाहका प्रस्ताव एवं मातलिका नारदजी, सुमुख एवं आर्यकके साथ इन्द्रके पास आकर उनके द्वारा सुमुखको दीर्घायु प्रदान कराना तथा सुमुख-गुणकेशी-विवाह  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.104.19 
सोऽयं मया च सहितो नारदेन च पन्नग:।
त्रिलोकेशं सुरपतिं गत्वा पश्यतु वासवम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
‘अतः यह सर्पपुत्र मेरे और नारदजी के साथ त्रिलोकीनाथ देवराज इन्द्र के पास जाकर उनसे मिले॥19॥
 
‘Therefore this son of a serpent should go with me and Naradji to the Trilokinath Devraj Indra and meet him.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)