Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.104.13: आर्यिका ने फिर कहा - 'हे देवमुनि! मेरा पुत्र मारा गया है और मेरा पौत्र भी उसी प्रकार मारा गया है; अतः मैं गुणकेशी को अपनी पुत्रवधू कैसे बनाऊँ?॥13॥ | mahabharat अध्याय 5.104: नारदजीका नागराज आर्यकके सम्मुख सुमुखके साथ मातलिकी कन्याके विवाहका प्रस्ताव एवं मातलिका नारदजी, सुमुख एवं आर्यकके साथ इन्द्रके पास आकर उनके द्वारा सुमुखको दीर्घायु प्रदान कराना तथा सुमुख-गुणकेशी-विवाह । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आर्यक उवाच
व्रियमाणे तथा पौत्रे पुत्रे च निधनं गते।
कथमिच्छामि देवर्षे गुणकेशीं स्नुषां प्रति॥ १३॥
अनुवाद
आर्यिका ने फिर कहा - 'हे देवमुनि! मेरा पुत्र मारा गया है और मेरा पौत्र भी उसी प्रकार मारा गया है; अतः मैं गुणकेशी को अपनी पुत्रवधू कैसे बनाऊँ?॥13॥
Aryaka again said, 'O sage of gods! My son has been killed and my grandson has also died in the same manner; therefore how can I wish to make Gunakeshi my daughter-in-law?॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥