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mahabharat 5.104.12: कण्व ऋषि बोले - 'कुरु नन्दन!' तब नागराज आर्यक प्रसन्न होकर विनीत स्वर में बोले - ॥12॥   |   mahabharat अध्याय 5.104: नारदजीका नागराज आर्यकके सम्मुख सुमुखके साथ मातलिकी कन्याके विवाहका प्रस्ताव एवं मातलिका नारदजी, सुमुख एवं आर्यकके साथ इन्द्रके पास आकर उनके द्वारा सुमुखको दीर्घायु प्रदान कराना तथा सुमुख-गुणकेशी-विवाह   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 104: नारदजीका नागराज आर्यकके सम्मुख सुमुखके साथ मातलिकी कन्याके विवाहका प्रस्ताव एवं मातलिका नारदजी, सुमुख एवं आर्यकके साथ इन्द्रके पास आकर उनके द्वारा सुमुखको दीर्घायु प्रदान कराना तथा सुमुख-गुणकेशी-विवाह  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.104.12 
कण्व उवाच
स तु दीन: प्रहृष्टश्च प्राह नारदमार्यक:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
कण्व ऋषि बोले - 'कुरु नन्दन!' तब नागराज आर्यक प्रसन्न होकर विनीत स्वर में बोले - ॥12॥
 
Sage Kanva said, 'Kuru Nandan! Then King of Snakes Aryaka became pleased and said in a humble tone, ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)