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mahabharat 5.104.10-11h: हमारे हृदय में आपके और ऐरावत के प्रति विशेष श्रद्धा है। यह सुमुख (महान्) भी शील, शुचिता और संयम जैसे गुणों से युक्त है। अतः पितृहीन होने पर भी हम इसके गुणों के कारण इसे चुनते हैं ॥10 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.104: नारदजीका नागराज आर्यकके सम्मुख सुमुखके साथ मातलिकी कन्याके विवाहका प्रस्ताव एवं मातलिका नारदजी, सुमुख एवं आर्यकके साथ इन्द्रके पास आकर उनके द्वारा सुमुखको दीर्घायु प्रदान कराना तथा सुमुख-गुणकेशी-विवाह   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 104: नारदजीका नागराज आर्यकके सम्मुख सुमुखके साथ मातलिकी कन्याके विवाहका प्रस्ताव एवं मातलिका नारदजी, सुमुख एवं आर्यकके साथ इन्द्रके पास आकर उनके द्वारा सुमुखको दीर्घायु प्रदान कराना तथा सुमुख-गुणकेशी-विवाह  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  5.104.10-11h 
पितृहीनमपि ह्येनं गुणतो वरयामहे।
बहुमानाच्च भवतस्तथैवैरावतस्य च॥ १०॥
सुमुखस्य गुणैश्चैव शीलशौचदमादिभि:।
 
 
अनुवाद
हमारे हृदय में आपके और ऐरावत के प्रति विशेष श्रद्धा है। यह सुमुख (महान्) भी शील, शुचिता और संयम जैसे गुणों से युक्त है। अतः पितृहीन होने पर भी हम इसके गुणों के कारण इसे चुनते हैं ॥10 1/2॥
 
We have special respect for you and Airavat in our hearts. This Sumukh (great-hearted) is also blessed with virtues like modesty, cleanliness and self-control. Therefore, despite being fatherless, we choose him because of his virtues. ॥10 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)