Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.103.9-17: वासुकी, तक्षक, कर्कोटक, धनंजय, कालिय, नहुष, कंबल, अश्वतर, बाह्यकुंड, मणिनाग, अपूरण, खग, वामन, एलपत्र, कुकुर, कुकुन, आर्यक, नंदक, कलश, पोटक, कैलासक, पिंजरक, ऐरावत, सुमनोमुख, दधिमुख, शंख, नंद, उपनंद, आप्त, कोटरक, शिखि, निष्टुरिक, तित्तिर, हस्तिभद्र। कुमुद, मालिपिण्डक, पद्मन नामक दो नाग, पुण्डरीक, पुष्प, मुद्गरपर्णक, करवीर, पीठारक, संवृत्त, वृत्त, पिण्डर, बिल्वपत्र, मुशिकद, शिरीषक, दिलीप, शंखशीर्ष, ज्योतिष, अपराजित, कौरव्य, धृतराष्ट्र, कुहुर, कृषक, विरज, धारण, सुबाहु, मुखर, जय, बहरा, अन्धा, विशुण्डि, वीर और सुर-ये तथा अन्य अनेक नाग कश्यप के वंशज हैं। मताले! यदि तुम्हें यहाँ कोई वर अच्छा लगे तो देख लो॥9-17॥ | mahabharat अध्याय 5.103: नागलोकके नागोंका वर्णन और मातलिका नागकुमार सुमुखके साथ अपनी कन्याको ब्याहनेका निश्चय । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह