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mahabharat 5.103.8: यहाँ प्रत्येक कुल के नागों की संख्या हजारों, लाखों तथा असंख्य है। मैं तुम्हें उनका संक्षिप्त परिचय ज्येष्ठ से लेकर कनिष्ठ तक क्रम से देता हूँ। सुनो। 8.   |   mahabharat अध्याय 5.103: नागलोकके नागोंका वर्णन और मातलिका नागकुमार सुमुखके साथ अपनी कन्याको ब्याहनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.103.8 
बहूनीह सहस्राणि प्रयुतान्यर्बुदानि च।
नागानामेकवंशानां यथाश्रेष्ठं तु मे शृणु॥ ८॥
 
 
अनुवाद
यहाँ प्रत्येक कुल के नागों की संख्या हजारों, लाखों तथा असंख्य है। मैं तुम्हें उनका संक्षिप्त परिचय ज्येष्ठ से लेकर कनिष्ठ तक क्रम से देता हूँ। सुनो। 8.
 
Here, the number of snakes of each clan is in thousands, lakhs and innumerable. I will give you a brief introduction of them in the order of the eldest to the youngest. Listen. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)