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mahabharat 5.103.6: कुछ सर्पों के एक हजार सिर होते हैं, कुछ के पांच सौ, कुछ के सौ और कुछ के केवल तीन सिर होते हैं।   |   mahabharat अध्याय 5.103: नागलोकके नागोंका वर्णन और मातलिका नागकुमार सुमुखके साथ अपनी कन्याको ब्याहनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.103.6 
सहस्रशिरस: केचित् केचित् पञ्चशतानना:।
शतशीर्षास्तथा केचित् केचित् त्रिशिरसोऽपि च॥ ६॥
 
 
अनुवाद
कुछ सर्पों के एक हजार सिर होते हैं, कुछ के पांच सौ, कुछ के सौ और कुछ के केवल तीन सिर होते हैं।
 
Some serpents have a thousand heads, some have five hundred, some have a hundred and some have only three heads. 6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)