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mahabharat 5.103.4: सुरसा के पुत्र नागगण यहाँ शोक और शोक से रहित होकर निवास करते हैं। उनकी सुन्दरता, रंग और आभूषण अनेक प्रकार के हैं॥4॥   |   mahabharat अध्याय 5.103: नागलोकके नागोंका वर्णन और मातलिका नागकुमार सुमुखके साथ अपनी कन्याको ब्याहनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.103.4 
इह नानाविधाकारा नानाविधविभूषणा:।
सुरसाया: सुता नागा निवसन्ति गतव्यथा:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
सुरसा के पुत्र नागगण यहाँ शोक और शोक से रहित होकर निवास करते हैं। उनकी सुन्दरता, रंग और आभूषण अनेक प्रकार के हैं॥4॥
 
The sons of Surasa, the Nagas, reside here, free from grief and sorrow. Their beauty, colours and ornaments are of many kinds.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)