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mahabharat 5.103.25: तब मातलि ने प्रसन्न मन से नारद से कहा - 'मेरे प्रिय भाई, यह श्रेष्ठ सर्प मेरा दामाद बनने के योग्य प्रतीत होता है।   |   mahabharat अध्याय 5.103: नागलोकके नागोंका वर्णन और मातलिका नागकुमार सुमुखके साथ अपनी कन्याको ब्याहनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.103.25 
ततोऽब्रवीत् प्रीतमना मातलिर्नारदं वच:।
एष मे रुचितस्तात जामाता भुजगोत्तम:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
तब मातलि ने प्रसन्न मन से नारद से कहा - 'मेरे प्रिय भाई, यह श्रेष्ठ सर्प मेरा दामाद बनने के योग्य प्रतीत होता है।
 
Then Matali said to Narada with a happy heart - 'My dear brother, this excellent serpent seems worthy of being made my son-in-law.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)