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mahabharat 5.103.20: इसके माता-पिता कौन हैं? यह किस सर्प का पौत्र है और किसके वंश की महान् ध्वजा को सुशोभित कर रहा है?॥20॥   |   mahabharat अध्याय 5.103: नागलोकके नागोंका वर्णन और मातलिका नागकुमार सुमुखके साथ अपनी कन्याको ब्याहनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.103.20 
क: पिता जननी चास्य कतमस्यैष भोगिन:।
वंशस्य कस्यैष महान् केतुभूत इव स्थित:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
इसके माता-पिता कौन हैं? यह किस सर्प का पौत्र है और किसके वंश की महान् ध्वजा को सुशोभित कर रहा है?॥20॥
 
Who are its parents? Which snake's grandson is it and whose dynasty's great flag is it adorning?॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)